रायपुर, छत्तीसगढ़: माधव राव सप्रे स्कूल के पूर्व छात्रों का एक असाधारण समूह, “सप्रे याराना”, आज के दौर में सच्ची दोस्ती, सांप्रदायिक सौहार्द और निस्वार्थ सेवा की एक जीवंत मिसाल बनकर उभरा है। यह समूह, जिसमें शशिकांत यदु, शब्बीर हुसैन, दीपक, संतोष यादव, सरफराज, आमीन वारसी, वैभव गांवकर, संदीप साहू, राम सिंग ठाकुर, विजय सोनी, जयप्रकाश, अजय दुबे, अफजल, नरेंद्र जांगड़े, शांतनु सोनी, पुरुषोत्तम ठाकुर, संजय पटेरिया, राहुल गढ़वाल अनिल गौड़, अश्वनी बांदे, राजेश सिक्का, राकेश तावड़े, अभिषेक जैन, प्रफुल्ल, सईद जैसे नाम और लगभग 100 अन्य सदस्य शामिल हैं, दशकों पुरानी दोस्ती को न केवल निभा रहा है, बल्कि उसे पीढ़ी दर पीढ़ी मजबूत भी कर रहा है।
“सप्रे याराना” सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक ऐसा मजबूत धागा है जो इन सभी दोस्तों को एक परिवार की तरह बांधे रखता है। इनके रिश्ते की नींव स्कूल के दिनों में पड़ी थी और आज भी, हर रविवार को सप्रे मैदान में इनका मिलन इस दोस्ती को और गहरा कर देता है। चाहे सूरज चमके या बादल घिरें, क्रिकेट और फुटबॉल के जरिए ये दोस्त न केवल अपनी खेल भावना को जीवित रखते हैं, बल्कि अपने सुख-दुख भी आपस में बांटते हैं। यह नियमित मिलन इन्हें एक-दूसरे से जोड़े रखता है, जिससे हर सदस्य को यह एहसास होता है कि वह कभी अकेला नहीं है।

हर मुश्किल में साथ, हर खुशी में हमदम
“सप्रे याराना” के सदस्य एक-दूसरे के सुख-दुख में हमेशा चट्टान की तरह खड़े रहते हैं। किसी दोस्त के परिवार में दुर्भाग्यपूर्ण घटना होने पर, वे न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं, बल्कि कार्यक्रम के समापन तक भावनात्मक रूप से भी पूरा सहयोग देते हैं। दोस्तों की तबियत खराब होने पर, आर्थिक सहयोग के साथ-साथ मोरल सपोर्ट भी उनका अभिन्न अंग है। यह आपसी सहयोग और परवाह की भावना ही है जो इस समूह को इतना खास बनाती है।
पीढ़ी दर पीढ़ी जुड़ता नाता
इस दोस्ती की खासियत यह भी है कि यह सिर्फ वर्तमान पीढ़ी तक सीमित नहीं है। समूह के कई सदस्यों के बच्चे भी अब “सप्रे याराना” का हिस्सा बन चुके हैं और अपने बड़ों के साथ क्रिकेट और अन्य गतिविधियों में शामिल होते हैं। दोस्तों की पत्नियां भी समय-समय पर इस आत्मीय समूह में शामिल होती हैं, जिससे यह एक विस्तृत और खुशहाल परिवार जैसा माहौल बन जाता है। पिकनिक और अन्य मनोरंजक आयोजन उनके साझा पलों को और भी यादगार बनाते हैं।
कोरोना काल में बनी मानवता की मिसाल
“सप्रे याराना” की मानवीयता और सेवा भावना उस समय खुलकर सामने आई, जब कोरोना महामारी ने दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था। संकट की उस घड़ी में, समूह के सदस्यों ने निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा की। उन्होंने जरूरतमंदों को आवश्यक मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई और भोजन तथा अन्य जरूरी सामानों की आपूर्ति सुनिश्चित की। उनके इस प्रयास ने अनेक परिवारों को कठिन समय में सहारा दिया और समाज में सकारात्मकता का संचार किया।
“सप्रे याराना” वास्तव में सच्चे दोस्त, भाईचारे और निस्वार्थ सेवा का एक प्रतीक है। यह साबित करता है कि दोस्ती की कोई सीमा नहीं होती और बचपन में बने रिश्ते जीवन भर अटूट रह सकते हैं। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी हमें सिखाती है कि एकता, सहयोग, प्रेम और करुणा से हर मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
