रायपुर, [03 अप्रैल 2026]
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के पूर्व सदस्य मनोज सिंह ठाकुर (एडवोकेट) ने राज्य सरकार द्वारा घोषित ‘स्टेट कैपिटल रीजन’ (SCR) की योजना और उसकी आड़ में पनप रहे भू-माफिया तंत्र पर तीखा प्रहार किया है। श्री ठाकुर ने आरोप लगाया है कि विकास के नाम पर लाए गए इस प्रोजेक्ट ने रायपुर और आसपास के क्षेत्रों के हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों और किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
प्रेस नोट के मुख्य बिंदु:
रजिस्ट्री और ले-आउट में जानबूझकर देरी: श्री ठाकुर ने कहा कि SCR की सीमाओं और नियमों के निर्धारण में हो रही अत्यधिक देरी का सीधा फायदा भू-माफियाओं को मिल रहा है। छोटे प्लॉट धारकों की रजिस्ट्रियों और डाइवर्जन की प्रक्रियाओं को उलझाकर उन्हें आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
माफिया और प्रशासन का गठजोड़: एडवोकेट मनोज सिंह ठाकुर ने सवाल उठाया कि “जब आम आदमी अपनी गाढ़ी कमाई से खरीदे छोटे भूखंड पर मकान बनाने की अनुमति मांगता है, तो नियम आड़े आते हैं, लेकिन बड़े बिल्डरों और रसूखदारों की कॉलोनियों के लिए नियम रातों-रात कैसे बदल जाते हैं?”
किसानों में डर का माहौल: SCR प्रोजेक्ट के मास्टर प्लान को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट न कर, ग्रामीण क्षेत्रों में भय फैलाया जा रहा है ताकि किसान डरकर अपनी कीमती जमीनें कौड़ियों के दाम भू-माफियाओं को बेच दें।
लीगल हेल्प डेस्क की घोषणा: एक अधिवक्ता के रूप में अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए श्री ठाकुर ने घोषणा की है कि यदि SCR की आड़ में किसी भी गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार की जमीन पर माफिया कब्जा करने की कोशिश करता है या प्रशासन बेवजह रजिस्ट्री रोकता है, तो वे उनके हक के लिए निशुल्क कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
चेतावनी:
मनोज सिंह ठाकुर ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि अगले १५ दिनों के भीतर SCR की विसंगतियों को दूर कर रजिस्ट्रियों और विकास कार्यों की बाधाएं नहीं हटाई गईं, तो वे प्रभावित किसानों और परिवारों के साथ मिलकर सड़क से लेकर न्यायालय तक उग्र आंदोलन करेंगे।
मनोज सिंह ठाकुर (एडवोकेट)
वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व सदस्य, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल
रायपुर (छत्तीसगढ़)
