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कलिंगा विश्वविद्यालय के सीआईएफ के तत्वाधान में आणविक तकनीक पर ऑनलाईन ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन संपन्न

Abhinesh Pandey January 28, 2022

रायपुर । कलिंगा विश्वविद्यालय मध्य भारत का प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थान है। जिसे राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं
प्रत्यायन परिषद (नैक) के द्वारा बी प्लस की मान्यता प्रदान की गयी है ।यह छत्तीसगढ़ में एकमात्र निजी
विश्वविद्यालय है जो एनआईआरएफ रैंकिंग 2021 में उच्चस्तरीय 151-200 विश्वविद्यालयों में एक है।
कलिंगा विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रमों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद आदि प्रतिष्ठित संस्थानों से मान्यता प्रदान की गयी है।
मूल्य आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान पर केंद्रित कलिंगा विश्वविद्यालय में नये शोध और नयी
खोज को विकसित करने के लिए सर्वसुविधायुक्त सेंट्रल इंस्टुमेंटेशन सुविधा (सीआईएफ) की स्थापना की
गयी है। सीआईएफ के द्वारा विश्वविद्यालयीय छात्रों और शिक्षकों के साथ-साथ बाहरी शैक्षणिक संस्थानों
और अनुसंधान एवं विकास संगठनों के लिए भी उच्च-स्तरीय शोध उपकरणों को उपलब्ध कराकर एक
बेहतर शोध वातावरण बनाने के लिए प्रयास किया जाता है। सीआईएफ के द्वारा विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम
आयोजित किए जाते रहे हैं। इसी तारतम्य में कलिंगा विश्वविद्यालय में सीआईएफ विभाग के द्वारा स्केनिंग
इलेक्ट्रान माईक्रोस्कोप के सार्वजनिक व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम और एक्स-रे डिफ्रोक्टोमीटर के
आनलाईन प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन के उपरांत 28 जनवरी 2022 को आणविक तकनीक पर
एकदिवसीय ऑनलाईन ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया।
उक्त आयोजन के प्रथम चरण में कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.आर.श्रीधर, महानिर्देशक डॉ. बैजू
जॉन, सभी संकाय के अधिष्ठाता एवं समस्त विषयों के विभागाध्यक्ष, समस्त प्राध्यापक, प्रतिभागीगण और
विद्यार्थियों की वर्चुअल उपस्थिति में ज्ञान और विद्या की देवी माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन
एवं सरस्वती वंदना करने के पश्चात कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. श्रीधर ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि “इस
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में अत्याधुनिक अनुसंधान के लिए
नवीनतम और सबसे उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों के साथ एक केंद्रीय सुविधा प्रदान करना है। जो अपने
उपयोगकर्ताओं के शोध उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, उन्हें उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त करने के लिए सक्षम
बनाए।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सुषमा दुवे द्वारा मॉलेक्यूलर टेक्निक्स पर परिचय देने के साथ
पहले वैज्ञानिक सत्र के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। उनके द्वारा जैव प्रौद्योगिकी में आणविक
तकनीक के विभिन्न अनुप्रयोग पर जानकारी प्रदान की गयी। इसी सत्र में रसायन विभाग की सहायक
प्राध्यापक डॉ. प्रीति पांडेय ने रसायन शास्त्र विषय में आणविक तकनीक के विभिन्न अनुप्रयोगों पर विस्तार
से प्रकाश डाला। अगले सत्र में फार्मेसी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप तिवारी के द्वारा फार्मेसी विषय में
आणविक तकनीक के विविध अनुप्रयोगों की जानकारी दी गयी। प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन सत्र डॉ.
प्रीति पांडेय के द्वारा संचालित किया गया। जिसमें प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि और प्रतिभागियों
के लिए औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ। उक्त समापन समारोह में कुलपति-
डॉ. आर. श्रीधर, महानिर्देशक डॉ बैजू जॉन, समस्त अधिष्ठाता और विभाग प्रमुख उपस्थित थे।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आणविक तकनीक की क्षमताओं और सीमाओं का बुनियादी ज्ञान प्रदान करने में
सफल रहा। जिसमें सैद्धांतिक पहलुओं पर व्याख्यान और प्रदर्शनात्मक प्रशिक्षण के विभिन्न सत्र आयोजित
किए गए। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को विभिन्न अनुप्रयोगों पर विस्तृत प्रशिक्षण देने के
सथ-साथ आणविक जीव विज्ञान और आनुवंशिक अनुसंधान के मूल सिद्धांतों की आधारभूत ज्ञान से
परिचित कराया गया। प्रतिभागियों को आणविक जीव विज्ञान प्रयोगशाला में कुछ बुनियादी उपकरणों का
उपयोग करने में प्रशिक्षण और आणविक तकनीकों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम ने प्रशिक्षुओं को उन्नत आणविक
तकनीकों का अध्ययन करने का अवसर प्रदान किया।
विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की मदद से प्रतिभागियों ने सूक्ष्म प्रसार विधियों और आनुवंशिक विश्लेषण विधियों पर
आधारित व्यापक ज्ञान को बारीकी से सीखा। इससे सम्मिलित प्रतिभागियों के ज्ञान में वृद्धि होगी और इस
प्रशिक्षण कार्यक्रम से उपलब्ध ज्ञान से प्रतिभागियों के साथ-साथ देश को भी फायदा होगा। कार्यक्रम के
सुगठित प्रारूप और सामग्री से शोधकर्ताओं को नियमित रूप से विभिन्न आणविक प्रक्रियाओं, नमूना तैयार
करने, डेटा संग्रह और मात्रा का ठहराव की चुनौतियों से निपटने में भरपूर मदद मिलेगी। आणविक
तकनीक की अंतर्निहित व्यापक ज्ञान को प्रसारित करने के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बहुत उपयोगी सिद्ध
हुआ।

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