रायपुर: राजधानी रायपुर में बारिश के बाद सड़कों की जर्जर हालत, जगह-जगह बने जानलेवा गड्ढों और लचर ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर नगर निगम व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। इस गंभीर जनहित के मुद्दे पर अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने नगर निगम, लोक निर्माण विभाग (PWD) और निर्माण एजेंसियों की नाकामी को उजागर करते हुए कानूनी व प्रशासनिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट की है।
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने जारी प्रेस बयान में कहा कि रायपुर की जनता भारी-भरकम संपत्ति कर (Property Tax), यूजर चार्ज और रोड सेस का नियमित भुगतान करती है, लेकिन बदले में नागरिकों को केवल जानलेवा गड्ढे, टूटी सड़कें और जलभराव का दंश झेलना पड़ रहा है। शहर के प्रमुख मार्गों से लेकर रिहायशी कॉलोनियों तक की सड़कें उखड़ चुकी हैं। डामरीकरण के कुछ ही महीनों में सड़कों का गड्ढों में तब्दील होना सीधे तौर पर घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग और गहरी प्रशासनिक लापरवाही को प्रमाणित करता है।
संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला (विधिक आधार):
विधिक पहलुओं को रेखांकित करते हुए अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं विभिन्न उच्च न्यायालयों ने अपने स्पष्ट फैसलों में कहा है कि सुरक्षित, सुगम और गड्ढामुक्त सड़क पाना प्रत्येक नागरिक का संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन जीने का मौलिक अधिकार (Fundamental Right) है। नगर निगम प्रशासन केवल खानापूर्ति के लिए गड्ढों में गिट्टी और मलबा डाल रहा है, जो बारिश में बहकर हादसों का सबब बन रहा है। आए दिन दोपहिया चालक गिर रहे हैं और स्कूल जाने वाले नौनिहालों व आम राहगीरों की जान लगातार जोखिम में बनी हुई है।
मामले में मुख्य तथ्य एवं प्रमुख मांगें:
रायपुर शहर के सभी मुख्य मार्गों एवं अंदरूनी कॉलोनियों की सड़कों का तत्काल पक्का, मानक और गुणवत्तापूर्ण डामरीकरण/सुधार कार्य किया जाए।
घटिया सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदारों और निगरानी में घोर लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई कर आर्थिक व प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाए।
जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों में सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम की युद्धस्तर पर ठोस सफाई सुनिश्चित की जाए।
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने स्पष्ट किया है कि नगर निगम और प्रशासन की यह विफलता सीधे तौर पर नागरिकों के अधिकारों का हनन है। प्रशासन को इस जनहित के मुद्दे पर अविलंब संज्ञान लेकर स्थायी व ठोस समाधान निकालना होगा।


