मुनि श्री आगम सागर जी महाराज ने दी मंगल देशना: समय रहते बच्चों को दें संस्कार, रक्षाबंधन पर मनमुटाव भूलकर अपनों को अपनाएं
श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में चल रहे समयोपदेश वर्षायोग 2026 के अंतर्गत पूज्य मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज, मुनि 108 श्री पुनीत सागर जी महाराज, एलक 105 श्री धैर्य सागर जी महाराज एवं एलक 105 श्री स्वागत सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर “रक्षाबंधन वात्सल्य महामहोत्सव” का भव्य आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ।
वर्षायोग समिति के कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय नायक जैन उपाध्यक्ष श्री श्रद्धेय जैन विक्की मीडिया प्रभारी प्रणीत जैन ने बताया कि आज प्रातः 6 बजे से ही बड़ा मंदिर के जिनालयों में धर्मप्रेमी बंधुओं की अपार भीड़ उमड़ पड़ी। जिनालय में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों के प्रथम चरण में श्रीजी का अभिषेक एवं मूलनायक भगवान की महाशांतिधारा संपन्न हुई। आज प्रथम 4 कलश करने का सौभाग्यशाली अवसर डॉ. रोहित जैन, श्री अमित जैन एवं श्री दिव्य जैन परिवार को प्राप्त हुआ। मूलनायक भगवान का मस्तकाभिषेक करने का सौभाग्य त्रिकाल चौबीसी में भगवान विराजमान करने वाले प्रेमी परिवार (सतना वाले) टैगोर नगर, श्री संजय जैन, श्रीमती दीप्ति जैन, श्री अर्हम जैन एवं अनुज्ञा जैन को प्राप्त हुआ।
मूलनायक भगवान के समक्ष विराजमान श्रीजी की शांतिधारा करने का सौभाग्य पूर्व ट्रस्टी एवं अध्यक्ष श्री प्रीतम जैन, श्रीमती सरिता जैन, श्री श्रद्धेय जैन (विक्की) एवं श्रीमती दीप्ति जैन परिवार को प्राप्त हुआ। त्रिकाल चौबीसी में भगवान विराजमान करने हेतु जैन संस (टैगॉर नगर) के श्री सुरेश चंद जी जैन एवं श्री अजय कुमार जैन ने एक प्रतिमा के माध्यम से पुण्यार्जन किया। रक्षाबंधन पूजन में अर्पित किए जाने वाले श्रीफल के पुण्यार्जक के रूप में देवेंद्र नगर निवासी श्री अजीत जैन एवं श्रीमती संध्या जैन तथा श्री सुरेश चंद जैन एवं श्री धीरज जैन (चूड़ी वाला परिवार) को सौभाग्य मिला। घर-घर कलश योजना के अंतर्गत महावीर नगर से श्री दिनेश जैन, श्रीमती प्रीति जैन, श्री अंशुल जैन एवं गुढ़ियारी से श्री संदीप कुमार व श्री अभिषेक जैन ने सहभागिता कर पुण्यार्जन किया।
अभिषेक एवं शांतिधारा के उपरांत विशाल भव्य पंडाल में निर्मित सुंदर मंच पर श्रीजी को विराजमान किया गया, जिसके समक्ष आकर्षक माण्डला सजाया गया था। पूज्य मुनिश्री ससंघ के मंत्रोच्चार के बीच रक्षाबंधन पूजन विधान प्रारंभ हुआ, जिसमें कुल 700 अर्घ्य एवं श्रीफल समर्पित किए गए। राष्ट्रीय मंच संचालक एवं ओजस्वी वक्ता श्री राजेश रज्जन जैन के सुमधुर संचालन एवं संगीतमय धार्मिक धुनों पर प्रमुख पात्रों, इंद्रों एवं इंद्राणियों ने भक्तिमय नृत्य करते हुए अर्घ्य समर्पित किए। कार्यक्रम के अंत में वर्षायोग समिति द्वारा मुनिश्री ससंघ के मुखारविंद में अभिमंत्रित सुंदर राखी (ब्रेसलेट) का वितरण सभी को किया गया।
बच्चों को समय रहते दें संस्कार, बिगड़ने के बाद पछतावे से लाभ नहीं: मुनिश्री
पूज्य मुनि श्री आगम सागर जी महाराज ने अपनी मंगल देशना में संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को प्रारंभ से ही धर्म के मार्ग पर चलाएं। आजकल बच्चे धर्म से विमुख होकर जब जीवन में सबकुछ गंवा बैठते हैं और लाइफ बिगड़ जाती है, तब मुनिश्री के पास आकर पछताते हैं। मुनिश्री ने कहा कि आजकल के युग में बच्चे अपनों से कहते हैं कि हमारी जिंदगी में इंटरफेयर न करें, हमें आजादी से जीने दें। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि बात बिगड़ने से पहले ही बच्चों को सही संस्कार दें और उनका ध्यान रखें।
मुनिश्री ने शास्त्रों का संदर्भ देते हुए सीख दी कि कन्या का विवाह, ऋण का भुगतान और अग्नि का शमन—इन तीनों कार्यों को शीघ्र निपटा लेना चाहिए, क्योंकि यदि ऋण समय रहते या समय के पूर्व नहीं चुकाया तो ब्याज बढ़ता ही जाएगा और कभी खत्म नहीं होता और यदि अग्नि भड़क जाए तो केवल विनाश ही होता है। बेटी के विवाह में देरी करने पर बाद में पछताना पड़ता है। जब तक माता-पिता सोचते हैं कि बच्ची अभी छोटी है, तब तक समय निकल जाता है। इसलिए समय रहते सही निर्णय लेना ही बुद्धिमानी है।
रक्षाबंधन के पावन पर्व का संदेश देते हुए मुनिश्री ने कहा कि इस दिन कुछ करें या न करें, लेकिन एक कार्य अवश्य करें—जिस अपनों से बोलचाल बंद है या मिलना-जुलना बंद है, उनके पास स्वयं जाएं और मनमुटाव मिटाएं। आज लोग अपनों को छोड़कर दूसरों को अपना बनाने में लगे हैं, जबकि कटु सत्य यही है कि ‘अपने तो अपने होते हैं’।
पूजन विधान के उपरांत मुनि श्री आगम सागर जी महाराज ससंघ की नवधा भक्ति के साथ आहार चर्या संपन्न हुई। श्रावकों ने अत्यंत भक्तिभाव से पढ़गाहन कर मुनिश्री ससंघ को अपने निवास स्थान ले जाकर आहार जल पूर्ण कराया।
कार्यक्रम के समापन पर वर्षायोग समिति द्वारा सभी श्रद्धालुओं के लिए सुस्वादिष्ठ स्वल्पाहार एवं ब्रेंच की व्यवस्था की गई। वर्षायोग समिति के परम संरक्षक श्री विनोद जैन बड़जात्या,श्री प्रदीप जैन विश्वपरिवार,अध्यक्ष श्री नरेंद्र जैन (गुरुकृपा), श्री भरत जैन (भोरावत),श्री प्रभात जैन,श्री संजय जैन एवं श्री नवीन जैन (मोदी)श्री दिलीप जैन,श्री बंशीलाल जी जैन,श्री शैलेन्द्र जैन,श्री नीरज जैन,महिला मंडल की संरक्षिका श्रीमती अरुणा जैन गुरुकृपा,शालिनी जैन,अध्यक्ष श्रीमती सरिता जैन,श्रीमती रेखा जैन,श्रीमती सपना जैन,ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए समस्त समाज जनों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अभिषेक-शांतिधाराकर्ताओं, त्रिकाल चौबीसी पुण्यार्जकों, स्वल्पाहार, श्रीफल, पंडाल एवं आहार दान देने वाले सभी पुण्यशाली परिवारों की भावभीनी अनुमोदना की।


