जीनोमिक विज्ञान, नवाचार एवं किसान-केंद्रित अनुसंधान पर जोर
रायपुर, 7 अक्टूबर 2026। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (ICAR–NIBSM), रायपुर का 14वां स्थापना दिवस समारोह बुधवार को संस्थान परिसर में गरिमापूर्ण एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह में वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, किसानों, विद्यार्थियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की।
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. टी. आर. शर्मा, पूर्व उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली थे। डॉ. गिरिश चंदेल, कुलपति, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर; प्रो. पीयूष कांत पांडेय, कुलपति, एमिटी विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़, रायपुर तथा डॉ. के. पी. यादव, कुलपति, मैट्स विश्वविद्यालय, रायपुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. पी. के. राय, निदेशक, ICAR–NIBSM ने की। संस्थान के पूर्व संयुक्त निदेशक एवं कार्यवाहक निदेशक डॉ. जगदीश कुमार की विशेष उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ ICAR गीत एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। डॉ. अनिल दीक्षित, संयुक्त निदेशक, ICAR–NIBSM ने स्वागत उद्बोधन देते हुए मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, आमंत्रित गणमान्य व्यक्तियों, किसानों, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों एवं संस्थान के अधिकारियों-कर्मचारियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने संस्थान की अब तक की यात्रा तथा जैविक स्ट्रेस प्रबंधन के क्षेत्र में इसकी बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।
इसके पश्चात डॉ. पी. के. राय, निदेशक, ICAR–NIBSM ने संस्थान की प्रगति, प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों एवं विभिन्न गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने बदलते कृषि परिदृश्य में कीट, रोग, खरपतवार एवं अन्य जैविक स्ट्रेस के प्रभावी प्रबंधन के लिए बहुविषयक अनुसंधान, नवाचार तथा किसान-केंद्रित तकनीकी विकास को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
जीनोमिक विज्ञान एवं जीन खोज पर स्थापना दिवस व्याख्यान
मुख्य अतिथि डॉ. टी. आर. शर्मा ने स्थापना दिवस व्याख्यान “Genomic Science and Gene Discovery” विषय पर दिया। उन्होंने जीनोमिक विज्ञान एवं जीन खोज की विकास यात्रा को विस्तार से समझाते हुए चावल में ब्लास्ट रोग के संदर्भ में Pi54 जीन की खोज एवं उसके वैज्ञानिक उपयोग की यात्रा पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि जीनोमिक विज्ञान एवं आधुनिक आणविक तकनीकों ने रोग प्रतिरोधी फसलों के विकास तथा अधिक उपज एवं टिकाऊ कृषि की दिशा में नई संभावनाएं उत्पन्न की हैं। उन्होंने कृषि अनुसंधान में आधुनिक जीनोमिक तकनीकों को किसानों एवं खेतों की वास्तविक समस्याओं से जोड़ने तथा उच्च उत्पादकता एवं जलवायु-सहिष्णु कृषि के लिए इनका प्रभावी उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया।
वैज्ञानिक प्रकाशनों का विमोचन
इस अवसर पर संस्थान द्वारा तैयार विभिन्न वैज्ञानिक प्रकाशनों का विमोचन किया गया। इनमें प्राकृतिक खेती, आक्रामक कीट एवं रोग तथा विभिन्न व्यावहारिक मैनुअल प्रमुख रूप से शामिल थे। इन प्रकाशनों को वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार तथा विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, किसानों एवं अन्य कृषि हितधारकों के लिए उपयोगी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।
उत्कृष्ट वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का सम्मान
स्थापना दिवस समारोह में संस्थान के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों की उत्कृष्ट उपलब्धियों को सम्मानित किया गया। श्रेष्ठ वैज्ञानिक पुरस्कार डॉ. पी. मोवेंथन को प्रदान किया गया, जबकि श्रेष्ठ शोध-पत्र का पुरस्कार डॉ. एस. के. शर्मा एवं उनकी टीम को उनके उत्कृष्ट शोध योगदान के लिए प्रदान किया गया।
श्रेष्ठ कार्यकर्ता पुरस्कार श्री जाकिर हुसैन खिलजी को प्रदान किया गया। विद्यार्थियों की उपलब्धियों को प्रोत्साहित करते हुए श्रेष्ठ स्नातकोत्तर (PG) विद्यार्थी पुरस्कार श्री सौरभ तथा श्रेष्ठ स्नातक (UG) विद्यार्थी पुरस्कार सुश्री श्रेया को प्रदान किया गया।
अतिथियों ने सभी पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि पुरस्कार केवल व्यक्तिगत उपलब्धि का सम्मान नहीं हैं, बल्कि संस्थान में उत्कृष्टता, शोध गुणवत्ता, नवाचार, निष्ठा, अनुशासन एवं समर्पण की कार्य-संस्कृति को प्रोत्साहित करने का प्रभावी माध्यम हैं। विद्यार्थियों को प्रदान किए गए पुरस्कारों को युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया गया।
किसान–वैज्ञानिक संवाद एवं ट्राइकोग्रामा कार्ड का वितरण
स्थापना दिवस कार्यक्रम के अंतर्गत किसान–वैज्ञानिक संवाद भी आयोजित किया गया, जिसमें किसानों ने अपनी कृषि एवं फसल संबंधी समस्याओं को वैज्ञानिकों के समक्ष रखा। वैज्ञानिकों ने कीट एवं रोग प्रबंधन, जैविक स्ट्रेस तथा आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों से संबंधित व्यावहारिक समाधान एवं वैज्ञानिक सुझाव प्रदान किए।
इस अवसर पर सब्जी फसलों में विभिन्न कीटों के जैविक नियंत्रण के लिए किसानों को ट्राइकोग्रामा कार्ड वितरित किए गए। यह पहल रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने तथा जैविक एवं बायोरैशनल कीट प्रबंधन उपायों को बढ़ावा देने की दिशा में संस्थान के किसान-केंद्रित प्रयासों को दर्शाती है।
किसान–वैज्ञानिक संवाद का उद्देश्य अनुसंधान को किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना तथा वैज्ञानिक तकनीकों एवं जैविक स्ट्रेस प्रबंधन के प्रभावी उपायों को खेत तक पहुंचाना रहा।
कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिकों, तकनीकी एवं प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों तथा किसानों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. अनिल दीक्षित, संयुक्त निदेशक, ICAR–NIBSM द्वारा किया गया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. प्रियंका मीना ने किया।
14वें स्थापना दिवस समारोह ने संस्थान की अब तक की वैज्ञानिक यात्रा एवं उपलब्धियों को रेखांकित करने के साथ-साथ जीनोमिक विज्ञान, वैज्ञानिक नवाचार, जैविक एवं बायोरैशनल दृष्टिकोण तथा किसान-केंद्रित अनुसंधान के माध्यम से प्रभावी जैविक स्ट्रेस प्रबंधन और अधिक उत्पादक, टिकाऊ एवं लचीली भारतीय कृषि के निर्माण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया।
