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सोनपैरी में हिन्दू संगम, सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने किया पंच परिवर्तन का आह्वान

Abhinesh Pandey January 1, 2026

*राष्ट्र कार्य को गति देने का अवसर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष : पूजनीय सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत*

*”पंच परिवर्तन से राष्ट्र उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा “*

*संघ शताब्दी वर्ष पर हिंदू संगम में दिखी सामाजिक समरसता की झलक*

*हिन्दू धर्म सभी पंथ का मूल है, बँटने का नहीं संगठित होने का समय : श्री असंग देव जी*

” *संकट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने आदर्श प्रस्तुत किया”*

रायपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना के शताब्दी वर्ष के निमित्त छत्तीसगढ़ के रायपुर अंतर्गत अभनपुर के सोनपैरी स्थित असंग देव कबीर आश्रम में बुधवार को विशाल हिन्दू सम्मेलन आयोजित किया गया.

हिन्दू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूजनीय सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी मुख्यवक्ता, मुख्य अतिथि पूज्य गुरुदेव राष्ट्रीय संत श्री असंग देव एवं विशिष्ट अतिथि गायत्री परिवार की समाजसेवी श्रीमती उर्मिला नेताम की गरिमामयी उपस्थिति रही.

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इस अवसर पर पूजनीय सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने कहा, संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में हिन्दू सम्मेलन आयोजित हो रहे हैँ, मंडल स्तर पर यह आयोजन हो रहे हैँ, संघकी स्थापना का शताब्दी वर्ष उत्सव नहीं बल्कि राष्ट्र और समाज कार्य को और गति देने का अवसर है. इस अवसर पर स्वयंसेवक पंच परिवर्तन का विषय लेकर समाज में जा रहे हैँ. हम सिर्फ संकट की चर्चा नहीं करते हैँ बल्कि उपाय पर भी बात करते हैँ, क्योंकि यदि हम ठीक रहेंगे तो किसी संकट का असर नहीं होगा. उन्होंने अपने संबोधन में एक प्रेरक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा, एक खरगोश सोया था, अचानक पत्ता गिरा तो वह डर गया. उसने भगवान से माँगा, भगवान मुझे छोटा क्यों बनाया, कुछ हाथी जैसा बना देते. भगवान ने उसे तथास्तु कह दिया. अब वह तालाब में नहाने गया, तो वहाँ मेढकों ने कहा, वहाँ मगरमच्छ हैँ मत जाओ, खरगोश ने कहा हे भगवान मगरमच्छ जैसी मोटी खाल दे देते, भगवान ने कहा तथास्तु, इगले दिन वन में वह कहीं जा रहा था, तो जानवरों ने कहा, भागो जंगली भैंसों का झुण्ड आ रहा है, कोई मोटी खाल काम नहीं आएगी. इस पर खरगोश ने पुनः भगवान को याद किया. भगवान ने कहा, अलग-अलग रूप क्षमता मांगने के बजाय भय समाप्त करने का ही वरदान मांग लेते.

पूजनीय सरसंघचालक जी ने कहा – पाँच बातें व्यवहार में लानी होगी.

पहला भेद को खत्म करना होगा. समाज के हर वर्ग में हमारा उठना, बैठना, सुख दुःख में सहभागिता हो. सबको मैं अपना मित्र बनाऊंगा, यही सामाजिक समरसता है. पानी का साधन जो भी हो वह सबके लिए हो.

दूसरा, अपने घर में सप्ताह में एक दिन तय करके सब एक साथ भजन करें, साथ में घर पर बना भोजन करें. आपस के सुख दुःख की चर्चा करें. हम कौन हैँ, देश की स्थिति परिस्थिति पर चर्चा करें. महान आदर्शो पर चर्चा करना, उन्हें जीवन में कैसे अपनाएं इस पर चर्चा कर, प्रेरित करना.

तीसरा, आज ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती है, पर्यावरण संरक्षण के लिए मैं व्यक्तिगत स्तर पर क्या कर सकता हूँ. सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कैसे कम हो सकता है, पेड़ लगाओ, वाटर हार्वेस्टिंग कर सकते हैँ.

चौथा, स्व के मार्ग पर चलना. घर, परिवार, समाज में स्व भाषा बोलूंगा. यदि दूसरे प्रान्त में रहता हूँ तो वहाँ की भाषा भी सीख लूंगा. अपना वेश पहनना, हर दिन नहीं पहन सकता लेकिन पूजा में तो पहन सकता हूँ. अपनी वेशभूषा पहनना ही नहीं आता यह ठीक नहीं. स्वदेशी वस्तु का उपयोग अधिक करेंगे.

पांचवा, धर्म सम्मत आचरण कैसे करें, इसके लिए नागरिक कर्तव्य का पालन करना चाहिए. संविधान हमारे पुरखों ने हमें प्रदान किया है, उसमें हमारे मूल्य व संस्कृति के दर्शन की अभिव्यक्ति होती है. उन्हें पालन करना चाहिए. कुछ बातें क़ानून में नहीं हैँ, माता-पिता बड़ों के चरण स्पर्श करना, इससे विनम्रता आती है. बच्चोँ को संस्कार दें, घर में बच्चोँ से दान दिलवाने की परंपरा रही है, जिससे उनमें दायित्व का बोध आए.

संघ के शताब्दी वर्ष में स्वयंसेवक यही पाँच बातें लेकर समाज में जा रहे हैँ, स्वयंसेवकों ने इन विषयों को पहले स्वयं भी अपनाया है, इन पाँच बातों पंच परिवर्तन को अपना कर हम राष्ट्र व समाज की उन्नति में सहभागी हो सकते हैँ.

*मातृत्व स्नेह का अद्भुत दृश्य*

हिन्दू संगम में जैसे ही मंच पर मुख्य वक्ता, मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि को आमंत्रित किया गया. मंच पर उस समय मातृत्व स्नेह एवं मातृशक्ति के प्रति आदर का सुंदर दृश्य देखने को मिला जब पूजनीय सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत गायत्री परिवार की वरिष्ठ समाज सेवी श्रीमती उर्मिला नेताम जी जिन्हें आयु के कारण चलने में असुविधा हो रही थी, ऐसे में पूजनीय सरसंघचालक जी ने उनको सहारा देते हुए उन्हें भारत माता के चित्र में पुष्प अर्पित करने में सहयोग किया. यह अत्यंत प्रेरक दृश्य था.

*राष्ट्रीय संत श्री असंग देव ने दिया आशीर्वचन*

कार्यक्रम के अवसर पर मुख्य अतिथि पूज्य गुरुदेव राष्ट्रीय संत श्री असंग देव

अपने आशीर्वचन में कहा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक हमें और आपको स्वयं सेवा करना सिखाता है. मधुमक्खी में संगठन होता है तो हाथी भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता. आपका धन खो जाए पुनः मिल जाएगा, मित्र पुनः वापस आ जाएंगे लेकिन एक बार मनुष्य का शरीर व्यर्थ में छूट जाए तो उसके पुण्य को पुनः अर्जित नहीं किया जा सकता. देवताओं से भी श्रेष्ठ मनुष्य का जीवन होता है लेकिन उसके लिए संस्कार आवश्यक है, बिना संस्कार मनुष्य दानव बन जाता है. उन्होंने कहा, हिन्दू धर्म सभी पंथों की जड़ है, यह हमारा सौभाग्य है कि भारत जैसी पुण्य भूमि में जन्म हुआ जहां भगवान राम एवं कृष्ण जी का जन्म हुआ. आज बांग्लादेश समेत विश्व में जिस प्रकार चुनौती हैँ, ऐसे में बंटने नहीं संगठित होने का समय है. उन्होंने कहा, देश में जब भी कोई आपदा आ जाए तो सबसे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक खड़ा मिलेगा, वह बिना प्रचार के कार्य करता है.

हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए गायत्री परिवार की समाजसेवी श्रीमती उर्मिला नेताम ने कहा, आज समाज को संगठन की सर्वाधिक आवश्यकता है. आज परिवार बिखर रहे हैँ, संस्कार देकर भारतीय संस्कृति को बचाया जा सकता है. आज विदेशी संस्कृति के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है, ऐसे में मातृ शक्ति का जागरण सबसे अधिक आवश्यकता है.

*कलाकारों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुति*

हिन्दू सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ी लोक कलाकार और गायिका आरु साहू और उनकी टीम ने भजन एवं लोकगीत की सुंदर प्रस्तुति दी. उनके भजन से पूरा वातावरण आधात्मिक हो गया.

*कोविदार पौधा लगाकर प्रकृति संरक्षण का सँदेश*

हिन्दू संगम कार्यक्रम के पश्चात पूजनीय सरसंघचालक जी ने सोनपैरी गांव में कोविदार पौधा लगाकर लोगों को पर्यावरण के प्रति दायित्व का संदेश दिया.

 

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