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रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में छत्तीसगढ़ का पहला एबीओ-इनकम्पैटिबल पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट सफल

Abhinesh Pandey February 10, 2026

 

• _1.5 वर्षीय बच्चे पर किए गए इस सफल ट्रांसप्लांट से छत्तीसगढ़ एवं आसपास के राज्यों के परिवारों को उन्नत बाल लिवर ट्रांसप्लांट सुविधा अपने ही राज्य में उपलब्ध हो सकेगी, जिससे महानगरों पर निर्भरता कम होगी।_

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रायपुर।

रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए छत्तीसगढ़ का पहला एबीओ-इनकम्पैटिबल पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया है। यह मामला न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत में दुर्लभ और अत्यंत चुनौतीपूर्ण मामलों में से एक माना जा रहा है, जो क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ी प्रगति को दर्शाता है।

डेढ़ वर्ष का यह बच्चा जन्म से ही पीलिया, पेट में पानी भरना, गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त लिवर, संक्रमण तथा अत्यंत कम हीमोग्लोबिन जैसी समस्याओं से पीड़ित था। विस्तृत जांच एवं मूल्यांकन के बाद डॉक्टरों ने पहले संक्रमण को नियंत्रित किया और फिर लिवर ट्रांसप्लांट को बच्चे के जीवन को बचाने का एकमात्र विकल्प माना।

दोनों माता-पिता लिवर दान करने के लिए तैयार थे, लेकिन रक्त समूह मेल न खाने के कारण सामान्य लिवर ट्रांसप्लांट संभव नहीं था। ऐसे में मेडिकल टीम ने एबीओ-इनकम्पैटिबल लिवर ट्रांसप्लांट का निर्णय लिया, जो विशेष रूप से छोटे बच्चों में अत्यंत दुर्लभ और जोखिमपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है।

इस केस की जटिलता इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि बच्चे की रक्त नलिकाएं बेहद छोटी और नाजुक थीं, जिससे सर्जरी के दौरान पुनर्निर्माण एक बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उन्नत तकनीक और उच्च स्तरीय सर्जिकल कौशल के माध्यम से लैप्रोस्कोपिक तरीके से यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की, जिसमें पिता ने अपने लिवर का एक हिस्सा दान किया।

सर्जरी के बाद बच्चे को अस्थायी रूप से सांस से जुड़ी समस्या हुई, जिसके लिए ब्रोंकोस्कोपी की आवश्यकता पड़ी। समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप, उन्नत दवाइयों और सतत निगरानी के चलते बच्चे की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और कुछ ही दिनों में उसे स्वस्थ एवं स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में सभी सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं की उपलब्धता एक बार फिर व्यवहारिक रूप से देखने को मिली।

डॉ. संदीप दवे, मेडिकल एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल्स ने कहा,

“यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि अब छत्तीसगढ़ और मध्य भारत में अत्याधुनिक और जटिल चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं। अब परिवारों को जीवनरक्षक पीडियाट्रिक ट्रांसप्लांट के लिए दूर-दराज के शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं है। यह सफलता हमारी पूरी मेडिकल टीम की प्रतिबद्धता, अनुभव और तकनीकी उत्कृष्टता को दर्शाती है।”

“एक यूनिट के रूप में, हम राज्य में कैडेवर अंग प्रत्यारोपण सेवाओं के प्रति जागरूकता फैलाने की भी सिफारिश करते हैं, ताकि अंग दान की प्रतीक्षा कर रहे उन अनेक मरीजों को आशा मिल सके, जो कैडेवर अंग प्रत्यारोपण के बारे में जानकारी के अभाव में अपनी जान गंवा देते हैं।”

डॉ. सोनल अस्थाना, सीनियर कंसल्टेंट – लिवर ट्रांसप्लांट एवं एचपीबी एवं ट्रांसप्लांटेशन, एस्टर इंटीग्रेटेड लिवर केयर इंस्टीट्यूट ने कहा,

“एबीओ-इनकम्पैटिबल लिवर ट्रांसप्लांट में सबसे बड़ी चुनौती इम्यूनोलॉजिकल मैनेजमेंट होती है, विशेष रूप से बाल रोगियों में। इस प्रकार के ट्रांसप्लांट में जोखिम अधिक होता है। सख्त प्री-ट्रांसप्लांट प्रोटोकॉल, सावधानीपूर्वक तैयारी और मल्टी-डिसिप्लिनरी अप्रोच के माध्यम से यह जटिल प्रक्रिया सुरक्षित रूप से पूरी की गई।”

डॉ. वचन एस हुक्केरी, सीनियर कंसल्टेंट – लिवर ट्रांसप्लांट एवं एचपीबी सर्जरी ने कहा,

“सर्जरी के प्रत्येक चरण में अत्यधिक सावधानी और सटीकता की आवश्यकता थी, क्योंकि शिशु की रक्त नलिकाएं बेहद छोटी और नाजुक थीं। सटीक सर्जिकल योजना और टीमवर्क के कारण हम इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर सके।”

डॉ. हितेश दुबे, कंसल्टेंट – हेपेटोबिलियरी एवं लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन, रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल, रायपुर ने कहा,

“इतने छोटे बच्चे में एबीओ-इनकम्पैटिबल पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है। सटीक योजना, आधुनिक तकनीक और टीमों के बीच बेहतर समन्वय के चलते सर्जरी सफल रही। बच्चे का तेजी से स्वस्थ होना हमारे लिए सबसे बड़ा संतोष है।”

डॉ. पवन जैन, विभागाध्यक्ष – बाल रोग, रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल, रायपुर ने कहा,

“ऐसे मामलों में सर्जरी से पहले और बाद की देखभाल अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। निरंतर निगरानी और समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप के कारण बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ और स्थिर है।”

विशेषज्ञ डॉक्टरों, उन्नत तकनीक और समर्पित देखभाल के संयुक्त प्रयासों से बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है और यह सफलता न केवल परिवार बल्कि पूरे राज्य के लिए आशा और विश्वास का प्रतीक बन गई है।

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