जगदलपुर में सहकार से समृद्धि राष्ट्रीय वर्कशॉप का शुभारंभ
रायपुर। बस्तर से सहकारिता का नया सूर्योदय। जगदलपुर में आज सहकार से समृद्धि राष्ट्रीय वर्कशॉप का शुभारंभ हुआ। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के इस दो दिवसीय मंथन से देश के अंतिम छोर तक समृद्धि पहुंचाने का संकल्प लिया गया। छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन (सहकार से समृद्धि) ने सहकारिता आंदोलन को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की है। इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष भूटानी, अपर मुख्य सचिव (तमिलनाडु) पी. अमुधा, अतिरिक्त सचिव पंकज बंसल, संयुक्त सचिव सिद्धार्थ जैन, छत्तीसगढ़ शासन के सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना और पंजीयक रमेश कुमार शर्मा सहित देश भर के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और सहकारिता विशेषज्ञ शामिल हुए।

सम्मेलन का मुख्य फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, पैक्स (PACS) के कंप्यूटरीकरण, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिरता और आगामी दो-तीन वर्षों में लगभग 95 हजार नई प्राथमिक कृषि साख समितियों के गठन के राष्ट्रीय लक्ष्यों पर रहा। इस दौरान यह स्पष्ट किया गया कि हर राज्य की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग स्थानीय समाधान तलाशने होंगे। नाबार्ड द्वारा विकसित किए जा रहे एकीकृत कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) और साइबर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने पर भी विशेष बल दिया गया।

इस राष्ट्रीय मंच से बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने ‘बदलता बस्तर’ का अनमोल खाका पेश करते हुए बताया कि कैसे बस्तर अब माओवाद के साये से निकलकर आधुनिक कनेक्टिविटी, स्टार्टअप संस्कृति (थिंक-बी, आईआईएम कलकत्ता), डिजिटल व्लॉगिंग (बस्तर क्रिएटर्स हब), और वनोपज प्रसंस्करण के जरिए आर्थिक समृद्धि की राह पर अग्रसर है। सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ (आजीविका व कौशल केंद्र) में बदलने की अनूठी पहल ने यह साबित कर दिया है कि बस्तर में शांति और विकास अब एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं।

सम्मेलन के समापन के पश्चात देश भर से आए अधिकारियों ने विश्वविख्यात चित्रकोट जलप्रपात पर बस्तर की समृद्ध लोक-संस्कृति, पारंपरिक ‘गौर नृत्य’ और प्राकृतिक वैभव का आत्मीय अनुभव किया। यह आयोजन न केवल बस्तर में सहकारिता के प्रशासनिक सशक्तीकरण का गवाह बना, बल्कि राष्ट्रीय मानचित्र पर बस्तर की एक नई, सकारात्मक और विकासशील पहचान को भी प्रस्थापित कर गया है।
अश्वनी कुमार कौशिक जगदलपुर
