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कलिंगा विश्वविद्यालय में एल्सेवियर स्कोपस पर एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न

Abhinesh Pandey December 2, 2025

रायपुर।

सेंट्रल लाइब्रेरी और रिसर्च विभाग, कलिंगा विश्वविद्यालय ने एल्सेवियर के सहयोग से “प्रवृत्तियों से रूपांतरण तक: शोध प्रभाव के लिए स्कोपस और प्रकाशन अंतर्दृष्टियों का उपयोग” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 28 नवंबर 2025 को कलिंगा विश्वविद्यालय परिसर, नया रायपुर में किया। कार्यशाला हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई। इसमें 30 शोधार्थियों, संकाय सदस्यों और पेशेवरों ने प्रत्यक्ष रूप से सक्रिय रूप से भाग लिया, जबकि पूरे भारत से 70 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन जुड़कर सहभागिता की।

कार्यक्रम का उद्घाटन कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. श्रीधर द्वारा किया गया, जिन्होंने विश्वविद्यालय की शोध गुणवत्ता, प्रकाशन दृश्यता और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ाने की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उद्घाटन सत्र में सभी अधिष्ठाता और विभागाध्यक्ष भी उपस्थित थे।

यह कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित किया गया। पहले सेशन को डॉ. नितिन घोषाल, पीएचडी., कस्टमर सक्सेस मैनेजर, साउथ एशिया, एल्सेवियर ने संबोधित किया, जिन्होंने स्कोपस डेटाबेस, नेविगेशन टेक्नीक, एडवांस्ड सर्च स्ट्रेटेजी, बिब्लियोमेट्रिक डेटा एक्सट्रैक्शन, और असरदार रिसर्च प्लानिंग और सहयोग पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उनके सत्र ने प्रतिभागियों को शोध प्रवृत्तियों को ट्रैक करने, मेट्रिक्स का विश्लेषण करने और प्रकाशन के अवसरों की पहचान करने जैसी व्यावहारिक कौशलों से सुसज्जित किया।

दूसरा सत्र डॉ. अब्दुल अज़ीज़ ई. पी., सहायक प्रोफेसर, वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा संबोधित किया गया। उन्होंने प्रकाशन संबंधित अंतर्दृष्टियों, अकादमिक लेखन, उच्च-प्रभाव वाले जर्नलों में प्रकाशन की रणनीतियों, प्रकाशन के नैतिक पक्ष, पांडुलिपि अस्वीकृति के सामान्य कारणों, तथा शोध में जेनरेटिव एआई और असिस्टिव एआई की उभरती भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने प्रतिभागियों को अपने अकादमिक लेखन की गुणवत्ता और दृश्यता बढ़ाने के लिए व्यावहारिक दिशानिर्देश भी प्रदान किए।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को उनके शोध और प्रकाशन क्षमताओं में सशक्त बनाना था, इसके लिए उन्हें स्कोपस टूल्स, प्रकाशन कार्यप्रवाह, जर्नल चयन, पांडुलिपि तैयारी, एआई एकीकरण, शोध मेट्रिक्स, नैतिकता और उनके अकादमिक लेखन की अस्वीकृति से बचने की रणनीतियों पर व्यापक जानकारी प्रदान की गई। इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं को सैद्धांतिक समझ के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल से सुसज्जित करना था, ताकि वे अपने अकादमिक लेखन की गुणवत्ता, शोध की दृश्यता और प्रकाशन सफलता को बढ़ा सकें।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. मोहम्मद नासिर, प्रोफेसर एवं विश्वविद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष थे, जबकि सह-संयोजक डॉ. हर्षा पाटिल – प्रभारी, रिसर्च विभाग थी।

इस कार्यक्रम ने कलिंगा विश्वविद्यालय की शोध उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को प्रभावी ढंग से मजबूत किया और संकाय, शोधार्थियों और पेशेवरों को सशक्त बनाया।

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