*शहर को चार क्लस्टर में बांटकर 5,000 से अधिक बीट की होगी दैनिक निगरानी*
*स्रोत पर कचरे का पृथक्करण नए नियमों की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था : नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा*
रायपुर, 30 सितंबर 2026। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ रायपुर में सफाई व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणाम आधारित बनाने के लिए व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। रायपुर नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रमुख प्रावधानों और रायपुर में उनके क्रियान्वयन की तैयारियों की जानकारी दी।
श्री मिश्रा ने कहा कि आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत PRAGATI-50 के अंतर्गत देश के 50 शहरों का चयन इस उद्देश्य से किया गया है कि वहां स्वच्छता इस स्तर की हो कि शहर में आने वाले व्यक्ति को स्वच्छता स्पष्ट रूप से दिखाई दे। छत्तीसगढ़ से रायपुर और बिलासपुर को इन शहरों में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप रायपुर को विश्वस्तरीय शहर की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए नियमित सफाई व्यवस्था से आगे बढ़कर ऐसी प्रणाली विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका परिणाम जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
उन्होंने बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 में कचरे के स्रोत पर पृथक्करण को और अधिक व्यापक बनाया गया है। अब गीले और सूखे कचरे के साथ सैनिटरी कचरे तथा विशेष देखभाल वाले कचरे को भी अलग रखने पर जोर दिया गया है। सैनिटरी कचरे में डायपर और सैनिटरी पैड जैसी वस्तुएं शामिल हैं, जबकि विशेष देखभाल वाले कचरे में बैटरी, बल्ब, ट्यूब लाइट, पारा थर्मामीटर और ऐसी अन्य वस्तुएं शामिल हैं, जिनके सुरक्षित प्रबंधन की आवश्यकता होती है।
आयुक्त ने कहा कि, नागरिकों को कचरे को अलग-अलग करके देने की आदत विकसित करनी चाहिए। नगर निगम की कचरा संग्रहण व्यवस्था में भी चारों श्रेणियों के कचरे को अलग-अलग एकत्र करने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्रोत पर कचरे का सही पृथक्करण हो जाने से आगे की पूरी प्रसंस्करण और निस्तारण प्रक्रिया आसान हो जाती है तथा कचरे से उपयोगी संसाधनों की पुनर्प्राप्ति भी बेहतर ढंग से संभव होती है।
*बड़े कचरा उत्पादकों की जिम्मेदारी होगी अधिक*
श्री मिश्रा ने बताया कि नए नियमों में बड़े पैमाने पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों और परिसरों के लिए जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। बड़े आवासीय परिसर, मॉल, वाणिज्यिक परिसर, संस्थान, हॉस्टल और कॉलेज जैसे प्रतिष्ठान, जहां बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न होता है, उनके लिए कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी अधिक स्पष्ट की गई है।
उन्होंने कहा कि ऐसे परिसरों में उत्पन्न होने वाले गीले कचरे का यथासंभव परिसर में ही प्रसंस्करण किया जाना चाहिए। इसके लिए कंपोस्टिंग अथवा बायोमिथेनेशन जैसी व्यवस्थाएं अपनाई जा सकती हैं। इसी प्रकार अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग के लिए आवश्यकतानुसार छोटे स्तर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था कर उसका उपयोग बगीचों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि जहां बायोगैस संयंत्र उपलब्ध हैं, वहां संबंधित संस्थान समझौते के माध्यम से अपने गीले कचरे को ऐसे संयंत्रों तक पहुंचा सकते हैं। इससे कचरे से बायोगैस और ऊर्जा जैसे उपयोगी संसाधन प्राप्त किए जा सकते हैं।
आयुक्त ने कहा कि नए नियमों में डिजिटलीकरण पर भी विशेष जोर दिया गया है। कचरा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न हितधारकों को अपने अनुपालन की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करनी होगी। इससे पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
*चार क्लस्टर में बंटेगा रायपुर, 5,000 से अधिक बीट की होगी निगरानी*
रायपुर की सफाई व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों की जानकारी देते हुए श्री मिश्रा ने बताया कि पहले वार्ड स्तर पर मानवबल की संख्या के आधार पर निगरानी और भुगतान की व्यवस्था थी। अब रायपुर शहर को चार क्लस्टर में विभाजित कर बीट आधारित, प्रदर्शन एवं परिणाम आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जा रही है।
उन्होंने बताया कि सड़क, नाला, उद्यान, तालाब और अन्य सार्वजनिक स्थलों के लिए अलग-अलग बीट निर्धारित की जाएंगी। उदाहरण के तौर पर किसी सड़क का एक किलोमीटर, नाले का एक या दो किलोमीटर अथवा किसी उद्यान और तालाब के आसपास का निर्धारित क्षेत्र एक बीट हो सकता है। संबंधित एजेंसी को उस बीट की संपूर्ण सफाई की जिम्मेदारी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में इस बात पर जोर नहीं होगा कि किसी बीट में कितने कर्मचारी लगाए गए हैं। एजेंसी चाहे मानवबल का उपयोग करे या मशीनरी का, नगर निगम का मुख्य उद्देश्य निर्धारित क्षेत्र में वास्तविक और प्रभावी सफाई सुनिश्चित करना होगा।
प्रत्येक बीट की सफाई से पहले और बाद की तस्वीरें प्रतिदिन डिजिटल पोर्टल पर अपलोड की जाएंगी। आयुक्त ने बताया कि रायपुर में बीट की संख्या 5,000 से अधिक हो सकती है। इन सभी बीट की निगरानी के लिए एक केंद्रीय नियंत्रण केंद्र बनाया जाएगा, जहां से प्रतिदिन की रिपोर्टिंग की समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित एजेंसी का भुगतान उसके प्रदर्शन और परिणाम के आधार पर किया जाएगा। यदि निर्धारित बीट में अपेक्षित सफाई नहीं हुई तो भुगतान में कटौती की जाएगी।
*डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की भी होगी रियल टाइम निगरानी*
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने रायपुर में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की नियमितता तथा बड़ी संख्या में शिकायतें आने पर उनकी निगरानी और कार्रवाई को लेकर सवाल पूछे।
इसके जवाब में श्री मिश्रा ने बताया कि डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाले वाहनों के रूट को पूरी तरह डिजिटल किया जाएगा। प्रत्येक वाहन के लिए निर्धारित रूट और समय तय होगा। किस समय वाहन को किस क्षेत्र और किस घर के सामने पहुंचना है, इसकी निगरानी की जाएगी। निर्धारित रूट या समय में विचलन होने पर डिजिटल प्रणाली में तत्काल फ्लैग उत्पन्न होगा।
उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर यदि किसी घर में वाहन को सुबह 9 बजे पहुंचना निर्धारित है और वह 10 या 11 बजे पहुंचता है, तो समय में हुए इस विचलन की जानकारी प्रणाली में दर्ज होगी। इसी प्रकार यदि वाहन निर्धारित रूट से हटकर किसी अन्य स्थान पर जाता है तो उसकी भी रियल टाइम निगरानी की जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि नागरिकों के लिए भी शिकायत दर्ज करने की डिजिटल सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। किसी बीट में सफाई नहीं होने की शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित बीट की स्थिति की जांच की जा सकेगी और आवश्यकता पड़ने पर पहले और बादमे तस्वीरों के माध्यम से सफाई की स्थिति की पुष्टि की जा सकेगी।
*रायपुर में कचरा प्रसंस्करण के लिए पर्याप्त क्षमता उपलब्ध*
रायपुर की वर्तमान कचरा प्रबंधन व्यवस्था के संबंध में पूछे गए सवाल पर नगर निगम आयुक्त ने कहा कि आधारभूत संरचना की दृष्टि से शहर में उत्पन्न होने वाले कचरे के प्रसंस्करण के लिए पर्याप्त क्षमता उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि सरोना के पुराने डंप साइट का रेमेडिएशन किया जा चुका है और वर्तमान में नया डंप साइट विकसित नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि रायपुर में कचरा प्रबंधन की मूलभूत क्षमता उपलब्ध होने के बावजूद सफाई व्यवस्था में जो कमियां दिखाई देती हैं, उनमें निगरानी एक महत्वपूर्ण विषय है। नई बीट आधारित व्यवस्था और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की डिजिटल निगरानी के माध्यम से इस कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
*नागरिकों से स्रोत पर कचरा अलग करने की अपील*
श्री मिश्रा ने रायपुर के नागरिकों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की भावना को समझते हुए कचरा पृथक्करण को अपनी दैनिक आदत का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि नागरिकों की भागीदारी से ही स्थायी रूप से बेहतर स्वच्छता व्यवस्था बनाई जा सकती है।
उन्होंने स्वच्छता ही सेवा अभियान और सेवा संकल्प अभियान का उल्लेख करते हुए नागरिकों से अपने आसपास के क्षेत्रों की स्वच्छता में व्यक्तिगत योगदान देने तथा समय निकालकर स्वच्छता गतिविधियों में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्रोत पर कचरे का पृथक्करण, जिम्मेदार नागरिक व्यवहार और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था मिलकर रायपुर को अधिक स्वच्छ और बेहतर शहर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इस अवसर पर रायपुर नगर निगम के अपर आयुक्त श्री विनोद पांडे तथा उपायुक्त श्री जसदेव सिंह बाबरा विशेष रूप से उपस्थित रहे।


