रायपुर । ‘मिट्टी बचाओ’ सद्गुरु द्वारा शुरू किया गया एक ऐसा अभियान है, जो दुनिया भर के लोगों तक पहुँच रहा है। यह अभियान मिट्टी के संकट को दूर करने के लिए, दुनिया भर के 350 करोड़ लोगों को मिट्टी की सेहत को सुधारने के लिए एकजुट होने के लिए प्रेरित कर रहा है। इसका प्रयास दुनिया भर में नीतिगत बदलाव को बढ़ावा देना है – ताकि मिट्टी की रक्षा और पोषण हो सके, और मिट्टी को रेत बनने से बचाने के लिए उसमें कम से कम 3-6% जैविक (ऑर्गेनिक) सामग्री मौजूद हो। यह अभियान 192 देशों में एक नीति लाने का प्रयास है कि अगर लोगों के पास खेती की भूमि है, तो उसमें कम से कम 3-6% जैविक (ऑर्गेनिक) सामग्री होनी चाहिए। ये आने वाली पीढ़ी के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। रायपुर में मिट्टी बचाओं अभियान के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए ईशा फाउंडेशन रायपुर के स्वयंसेवकों ने रायपुर इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस में मिट्टी बचाओ आभियान (Save Soil Movement) जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम को इंस्टिट्यूट के सेंटर ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन के सहयोग से आयोजित किया गया जिसमे करीब 200 छात्र, छात्राओं एवं नर्सिंग स्टाफ विभागों के प्रोफेसर ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत इंस्टिट्यूट के डीन डॉ गंभीर सिंह ने दीप प्रज्वलित करके की और अपने अभिभाषण में सभी को मिट्टी के महत्व के बारे में अवगत कराया। इसी के साथ रायपुर Marine Drive पर सेव सॉइल आभियान के लिए जागरूकता अभियान चलाया। इसके लिए सभी ने सेव सॉइल के गाने पे डांस के द्वारा लोगों को जागरूक किया। रायपुर में छत्तीसगढ़ योग आयोग विभाग के लिए मिट्टी बचाओ अभियान को लेकर विप्र भवन में एक सत्र आयोजित किया गया । विप्रभवन प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री नरेंद्र तिवारी जी ने कहा, यह अभियान हमारे पूरे पीढ़ी की जिम्मेदारी है हमारे आने वाले पीढ़ियों के लिए। अतः ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभियान से जुड़ कर इसका हिस्सा बनें।

बिलासपुर के स्वयंसेवकों ने गुरु घासीदास विश्व विद्यालय में मिट्टी बचाओ आभियान(Save Soil Movement) जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में वानिकी, जीव विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान विभाग के करीब 150 छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। इन सभी विभागों के प्रोफेसर और एचओडी भी मौजूद थे। सद्गुरु के साथ कई विचारशील नेताओं, दूरदर्शी और प्रभावशाली लोगों का लक्ष्य है कि इस अभियान में 350 करोड़ लोग हिस्सा लें। वे मीडिया, लाइव इवेंट्स, सरकारी अधिकारियों के साथ बैठकें, और 24 देशों से गुज़रने वाली 30,000 किलोमीटर लम्बी मोटरसाइकिल यात्रा के माध्यम से सभी को इस अभियान का हिस्सा बनाना चाहते हैं। इस अभियान की मदद से हम प्रकृति के साथ गहराई से जुड़ पाएँगे, सरकारें अपनी नीतियों में बदलाव लाएंगी, और दुनिया में खुशहाली की बुनियाद तैयार होगी।

