**बलराम बघेल और सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों का सम्मान समारोह*
समय रथ, ब्यूरो प्रमुख: अश्वनी कुमार कौशिक, 96307 54908
*जगदलपुर, 02 नवम्बर 2026। कलेक्टोरेट के आस्था कक्ष में सोमवार को अक्टूबर माह में सेवानिवृत्त हुए 16 अधिकारी-कर्मचारियों का आत्मीय सम्मान समारोह हुआ। कलेक्टर आकाश छिकारा ने सभी को शॉल, श्रीफल और पेंशन प्राधिकार पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि 30-40 वर्ष की निष्ठापूर्ण सेवा गर्व की बात है। छत्तीसगढ़ और बस्तर के विकास में इनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। सेवा समाप्ति ‘रिटायर्ड’ होने का पर्याय नहीं, बल्कि ‘सेकंड इनिंग्स’ की शुरुआत है। अब परिवार के साथ समय बिताएं, स्वास्थ्य का ध्यान रखें और अपने अनुभव से युवाओं व नागरिकों का मार्गदर्शन करते रहें।

समारोह में जिला कोषालय की सराहना भी हुई। नियमित समीक्षा से बस्तर में अब 80-90 प्रतिशत मामलों में सेवानिवृत्ति के दिन ही पीपीओ और अन्य स्वत्व उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इस अवसर पर सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी श्री बलराम बघेल (बी.आर. बघेल) ने अपनी 39 वर्ष की सेवा यात्रा साझा की। उन्होंने बस्तर में शिक्षा की गुणवत्ता, नवोदय विद्यालय चयन, एनएमएमएस छात्रवृत्ति और बोर्ड परीक्षाओं में आए सुधारों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस प्रकार का सम्मान पूरे सेवाकाल की मेहनत को सार्थक बनाता है।
शासकीय सेवा में नियमों, प्रक्रियाओं और जनअपेक्षाओं के बीच दायित्व निभाना आसान नहीं। बलराम बघेल ने अपनी व्यवहार-कुशलता से यह सिद्ध किया। 30-35 छत्तीसगढ़ शासकीय कर्मचारियों की विभिन्न रिक्वायरमेंट्स और अपेक्षाओं को शालीनता से सुनकर, संतुलित तरीके से निपटाने के बाद भी उन्होंने किसी को असम्मानित महसूस नहीं होने दिया। उनकी यह व्यवहारिक कुशलता आज भी सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए उदाहरण है। भाऊक पाल से बातचीत में उन्होंने कहा कि सेवाकाल में जो अनुभव मिला, वह अब समाज के काम आए। सेवानिवृत्ति के बाद भी शालीनता और व्यावहारिक बुद्धि बनाए रखना ही असली सफलता है।
कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री तन्मय खन्ना, वरिष्ठ कोषालय अधिकारी श्री अनिल कुमार पाठक तथा सेवानिवृत्त सेवकों के परिजन व विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
यह समारोह केवल सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि यह संदेश था कि शासकीय सेवक सेवानिवृत्ति के बाद भी अपनी शालीनता, अनुभव और व्यवहार-कौशल से समाज के लिए उपयोगी बने रह सकते हैं। बलराम बघेल जैसे अधिकारी इस बात की जीवंत मिसाल हैं।
