*छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने गृहमंत्री को सौंपा गणेशोत्सव के लिए गाइडलाइन, लागू कराने की मांग*। *अश्लील गानों एवं फूहड़ नृत्य पर कानूनी कार्रवाई का आग्रह*। *उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को सिविल सोसायटी के संयोजक डा. कुलदीप सोलंकी ने दिया ज्ञापन पत्र*
रायपुर। गणेशोत्सव पर्व को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप प्रदान करने की दिशा में ‘छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी’ ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। संगठन ने एक विस्तृत मार्गदर्शिका (गाइडलाइन) तैयार कर राज्य सरकार को सौंपी है, ताकि उत्सव के दौरान सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक गरिमा और पर्यावरणीय संतुलन को अक्षुण्ण रखा जा सके।
छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा को ज्ञापन पत्र सौंपकर इन दिशा-निर्देशों को संपूर्ण प्रदेश में लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस जनहितकारी पहल से न केवल समाज में शांति, परस्पर सहयोग और अनुशासन की भावना सुदृढ़ होगी, बल्कि पर्व की पवित्रता भी बनी रहेगी। मामले में उपमुख्यमंत्री ने सकारात्मक रुख प्रकट किया है। *छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी द्वारा तय गाइडलाइन इस प्रकार है।*
*प्रमुख दिशा-निर्देश एवं कड़े कानूनी प्रावधान:*
1. *पर्यावरण संरक्षण एवं मूर्तियों हेतु कड़े नियम*
*PoP मूर्तियों पर प्रतिबंध*: प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) और प्लास्टिक निर्मित प्रतिमाओं के निर्माण व विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
दंड का प्रावधान: नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं पर संबंधित नगर निगम अथवा नगर पालिका द्वारा ₹10,000 से ₹50,000 तक का अर्थदंड रोपित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जब्त मूर्तियों के निस्तारण का व्यय भी दोषी विक्रेताओं से ही वसूला जाएगा।
*इको-फ्रेंडली विकल्प*: बाजार में केवल प्राकृतिक मिट्टी, पारंपरिक शिल्पकला और पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों से निर्मित मूर्तियों के विक्रय की ही अनुमति होगी।
*2. पंडालों की सुरक्षा, निगरानी एवं मर्यादा*
*नशा-मुक्त प्रवेश*: किसी भी व्यक्ति को नशे की अवस्था में पंडालों में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। आयोजकों, सुरक्षाकर्मियों एवं स्वयंसेवकों को संदिग्धों की जांच का अधिकार होगा। नियम तोड़ने वालों को तत्काल पुलिस के सुपुर्द किया जाएगा।
*अश्लीलता पर रोक*: पंडालों में अश्लील गानों के प्रसारण और फूहड़ नृत्यों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यदि ऐसा पाया जाता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर आयोजन समिति उत्तरदायी होगी और उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
*अनिवार्य सुरक्षा उपकरण*: प्रत्येक पूजा पंडाल में पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे और चालू हालत में अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguishers) लगाना अनिवार्य होगा।
3. *शोभायात्रा, जुलूस एवं ध्वनि नियंत्रण*
*अल्कोहल टेस्ट व BNS की धाराएं:* विसर्जन या स्वागत जुलूस में नशे में धुत्त होकर शामिल होने वालों पर कड़ी दृष्टि रखी जाएगी। पुलिस प्रशासन के पास संदिग्धों का स्थल पर ही अल्कोहल टेस्ट करने का अधिकार होगा।
सार्वजनिक उपद्रव पर कार्रवाई: नशे की हालत में पाए जाने वाले व्यक्तियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 355 (सार्वजनिक स्थल पर अनुचित आचरण) के तहत मामला दर्ज होगा। वहीं, अश्लीलता फैलाने या फूहड़ प्रदर्शन करने पर आयोजकों एवं दोषियों के खिलाफ धारा 296 (सार्वजनिक उपद्रव) के तहत कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।
*ध्वनि प्रदूषण सीमा*: निर्धारित डेसिबल स्तर और समय सीमा का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा।
*4. विसर्जन व्यवस्था एवं समय-सीमा*
*एकल विसर्जन दिवस*: अनंत चतुर्दशी के शुभ अवसर पर ही संपूर्ण प्रदेश में बड़ी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन संपन्न किया जाएगा। छोटी मूर्तियों का विसर्जन परंपरा अनुसार किया जा सकता है।
*चिन्हित स्थल:* विसर्जन केवल स्थानीय प्रशासन एवं नगर निगम द्वारा पूर्व-निर्धारित एवं अधिसूचित स्थलों पर ही किया जाएगा।
समय का पालन: विसर्जन शोभायात्रा सायं 6:00 बजे से प्रारंभ होकर मध्यरात्रि 12:00 बजे तक अनिवार्य रूप से समाप्त हो जानी चाहिए। समयसीमा एवं मर्यादा का पालन कराने का मुख्य दायित्व आयोजन समिति का होगा।
*प्रशासनिक सहयोग एवं जनहित में अपील*
मार्गदर्शिका में पुलिस एवं प्रशासनिक तंत्र से नियमित गश्त करने और दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया गया है। साथ ही स्वयंसेवक दलों को भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. कुलदीप सोलंकी ने विश्वास व्यक्त किया है कि यदि राज्य सरकार इन नियमों को प्रदेश स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करती है, तो गणेशोत्सव का यह महापर्व अत्यंत सुरक्षित, अनुशासित, भव्य और जनहितकारी वातावरण में संपन्न होगा।


