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धान की जगह अदरक की खेती से बदली किसान की तकदीर

Abhinesh Pandey August 7, 2026

 

पौन एकड़ से हुई लाखों की कमाई, मुनाफे से कराया घर का निर्माण

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फसल विविधीकरण से बढ़ रही किसानों की आय, धान के साथ अन्य फसलों को अपना रहे किसान

अम्बिकापुर 07 अगस्त 2026

राज्य शासन द्वारा फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब जिले में दिखाई देने लगा है। परंपरागत धान की खेती के साथ किसान अदरक, मिर्च, टमाटर सहित अन्य नगदी फसलों की खेती अपनाकर बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। जिले के ग्राम दरिमा निवासी किसान श्री संतोष कुमार सिंह, पिता श्री रामसरन सिंह, इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं।

श्री संतोष कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष लगभग पौन एकड़ क्षेत्र में अदरक की खेती की थी। बेहतर उत्पादन और बाजार में अनुकूल मूल्य मिलने से उन्हें लगभग साढ़े चार लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। अदरक का बाजार भाव लगभग 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिलने से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इस लाभ से उन्होंने अपने घर का ढलाई सहित निर्माण कार्य भी कराया, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।

किसान श्री सिंह ने बताया कि धान की तुलना में अदरक की खेती कहीं अधिक लाभकारी है। जहां धान की खेती में उत्पादन एवं आय सीमित रहती है, वहीं अदरक की खेती में कम क्षेत्र से भी अधिक लाभ प्राप्त होता है। पिछले वर्ष उन्हें लगभग 30 से 35 क्विंटल अदरक का उत्पादन मिला, जिससे लाखों रुपये की आय अर्जित हुई। इसी सफलता से प्रेरित होकर उन्होंने इस वर्ष अदरक की खेती का रकबा बढ़ाकर लगभग एक एकड़ कर दिया है।

उन्होंने बताया कि राज्य शासन द्वारा अन्य फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषक उन्नति योजनांतर्गत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे किसानों को आर्थिक सहयोग मिल रहा है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रोत्साहन से किसान परंपरागत खेती के साथ लाभकारी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

श्री संतोष कुमार सिंह ने बताया कि अदरक की बिक्री में भी किसी प्रकार की कठिनाई नहीं आती। मंडियों में गुणवत्तापूर्ण उपज का उचित मूल्य मिल जाता है, जिससे किसानों को अपनी मेहनत का बेहतर प्रतिफल प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति से खेती करें तो अदरक जैसी नगदी फसल उनकी आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन सकती है।

उन्होंने अन्य किसानों से भी धान के साथ अदरक, टमाटर, मिर्च, धनिया, अरहर जैसी अन्य फसलों की खेती अपनाने की अपील की। उनका कहना है कि फसल विविधीकरण से जोखिम कम होता है तथा आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित होते हैं, जिससे किसान आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बन सकते हैं।

अदरक की खेती की तकनीक साझा करते हुए श्री सिंह ने बताया कि मार्च-अप्रैल माह में खेत की अच्छी तरह जुताई कर आवश्यक खाद एवं पोषक तत्वों का उपयोग किया जाता है। इसके बाद मेड़ों पर अदरक की बुवाई की जाती है तथा पैराव (मल्चिंग) किया जाता है। इससे खेत में नमी बनी रहती है, खरपतवार की वृद्धि कम होती है तथा पौधों का बेहतर विकास होता है। परिणामस्वरूप अच्छी गुणवत्ता एवं अधिक उत्पादन प्राप्त होता है।

श्री संतोष कुमार सिंह का मानना है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ बाजार की मांग के अनुरूप नगदी एवं उद्यानिकी फसलों को अपनाएं और शासन की योजनाओं का लाभ लें, तो कम भूमि में भी बेहतर आय अर्जित कर अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना सकते हैं।

 

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