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उत्कल समाज को भाजपा ने राजनीतिक रूप से स्थापित किया: विधायक मिश्रा

Abhinesh Pandey March 31, 2024

 

–उत्कल दिवस आज: रायपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक व उत्कल समाज के नेता पुरंदर मिश्रा ने बताया उत्कल समाज का महत्व

रायपुर। उड़ीसा के स्थापना का 89 वां दिवस सोमवार को राजधानी में धूमधाम से मनाया जाएगा। इस मौके पर गवर्नमेंट स्कूल छोटापारा में आयोजित समारोह के मुख्यअतिथि राज्यपाल विश्व भूषण हरिचंदन होंगे। वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देवसाय कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे।
रायपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुरंदर मिश्रा के नेतृत्व व मार्गदर्शन में संपन्न होने वाले इस कार्यक्रम में अन्य कई प्रभावशाली अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। पुरंदर मिश्रा द्वारा गठित सर्व उड़िया समाज एवं उत्कल सांस्कृतिक परिषद के बैनर पर संपन्न होने वाले इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के समस्त मंत्रीगण नेता प्रतिपक्ष, सांसद, रायपुर शहर के विधायकगण, नगर निगम, रायपुर के महापौर सहित गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम अवसर पर सांस्कृतिक दलों द्वारा उड़िया गीत, भजन, ओडिसी नृत्य, संबलपुरी नृत्य सहित कई प्रकार के विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे इस अवसर पर समाज के प्रतिभाशाली व्यक्तियों का राज्यपाल के हाथों सम्मान भी किया जाएगा। उत्कल दिवस समारोह की चर्चा करते हुए विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा, उत्कल समाज को भाजपा ने राजनीतिक रूप से स्थापित किया है, जिसके लिए पूरा उत्कल समाज आभारी है।
वहीं इस बारे में उत्कल समाज के प्रवक्ता गुणनिधि मिश्रा ने बताया, देश के उड़ीसा प्रांत को 01 अप्रैल 1936 में पृथक राज्य के रूप में मान्यता मिली। तब आज के छत्तीसगढ़ का एक बड़ा भू-भाग उड़ीसा से पृथक हो गया और ये उड़िया भाषी के लोग (जिसमें विभिन्न जाति के लोगों का समावेश है) छत्तीसगढ़ में ही रह गए और आज की स्थिति में पूरे छत्तीसगढ़ में उड़िया समुदाय की बात करें तो इनकी कुल जनसंख्या 35 लाख से भी ज्यादा है, जो राज्य की सबसे बड़ी ओबीसी जाति साहू की संख्या 30,05,661 से भी ज्यादा है। इस तरह इन उत्कल वासियों की राजनीतिक महत्ता को भी स्थापित करने की जरूरत थी। हालांकि, इसकी शुरूआत 90 के दशक से ही शुरू हो गई थी और छत्तीसगढ़ में पहली बार 1994 में 01 अप्रैल को उत्कल दिवस मनाया गया। तब पुरंदर मिश्रा महज 30-32 साल के थे और इन्कम टैक्स की प्रैक्टिस किया करते थे। यहीं से उन्होंने उड़िया समाज के लोगों को एक जुट करने का प्रयास किया। नतीजन आज वे उसी समाज का प्रतिनिधित्व करते प्रदेश की राजधानी उत्तर विधानसभा से विधायक हैं।

प्रदेश में उड़िया भाषी बहुल क्षेत्र:
वैसे तो छत्तीसगढ़ का कोई कोना नहीं जहां इस समाज के लोग निवासरत नहीं करते। बावजूद सबसे ज्यादा जिन क्षेत्रों में इनकी आबादी सबसे ज्यादा है उनमें रायपुर, रायगढ़, जगदलपुर, कांकेर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा, सारंगढ़, सरायपाली, बसना, पिथौरा, खल्लारी, महासमुंद, गरियाबंद, भिलाई, दुर्ग के अलावा जशपुर, कुनकुरी, लैलूंगा, तनाखार, पुसौर, सरिया, बरमकेला, सरगुजा, बिलासपुर सहित अन्य क्षेत्र शामिल है। बता दें कि 35 लाख से भी ज्यादा उड़िया समाज के लोगों में आर्थिक रूप से सम्पन्न लोगों के साथ-साथ कमजोर तबके के लोगों का भरमार है और इस समाज के अंतर्गत 18 से भी ज्यादा विभिन्न जाति के लोग सम्मिलित हैं।

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